वैश्विक कृषि व्यापार पर संकट: अमेरिकी टैरिफ और मध्य पूर्व संघर्ष ने शिपिंग मार्गों को रोका; उर्वरक लागत में भारी उछाल।

मध्य पूर्व में बढ़ते संघर्ष ने 'हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य' (Strait of Hormuz) के माध्यम से वैश्विक शिपिंग को बाधित कर दिया है, जिससे भारत और ईरान के बीच ₹१.२ बिलियन के वार्षिक व्यापार को खतरा पैदा हो गया है। अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों ($८० से ऊपर) ने मुद्रास्फीति को बढ़ावा दिया है और बुवाई के मौसम से पहले उर्वरक की लागत को कई वर्षों के उच्चतम स्तर पर पहुंचा दिया है।

मार्च 6, 2026 - 09:27
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वैश्विक कृषि व्यापार पर संकट: अमेरिकी टैरिफ और मध्य पूर्व संघर्ष ने शिपिंग मार्गों को रोका; उर्वरक लागत में भारी उछाल।
एक भारी मालवाहक जहाज एक संकीर्ण समुद्री गलियारे से गुजर रहा है, जिसके किनारे कच्चे तेल और उर्वरक मूल्य सूचकांकों के बढ़ते ग्राफ दिखाई दे रहे हैं।

वैश्विक कृषि बाजार वर्तमान में भू-राजनीतिक संघर्ष और संरक्षणवादी व्यापार नीतियों की चपेट में है। मध्य पूर्व में सैन्य कार्रवाइयों ने शिपिंग मार्गों को काफी प्रभावित किया है, विशेष रूप से 'हॉर्मुज़ जलडमरूमध्य', जो वैश्विक उर्वरक और ऊर्जा आपूर्ति के लिए एक महत्वपूर्ण धमनी है। भारत के लिए, इसके कारण अनुमानित २ से ४ लाख टन चावल आपूर्ति श्रृंखला में फंस गया है और कांडला और मुंद्रा जैसे बंदरगाहों पर लगभग ३,००० कंटेनर अटके हुए हैं।

उत्पादन लागत पर प्रभाव दुनिया भर के किसानों के लिए चिंता का विषय बन गया है। कच्चे तेल की कीमतें $८० प्रति बैरल के पार जाने से कमोडिटी बाजार में मुद्रास्फीति का दबाव बढ़ गया है। ऊर्जा की बढ़ती लागत सीधे उर्वरक की ऊंची कीमतों में बदल रही है, जिससे विश्लेषकों को डर है कि अमेरिका और कनाडा में मक्का जैसी प्रमुख फसलों का बुवाई क्षेत्र कम हो सकता है। यह ऊर्जा संकट जैव ईंधन को भी आकर्षक बना रहा है, जिससे बायोडीजल मार्जिन में सुधार के कारण सोयाबीन तेल की कीमतें कई वर्षों के उच्च स्तर पर पहुंच गई हैं।

बड़ी शक्तियों के बीच व्यापारिक तनाव स्थिति को और जटिल बना रहा है। अमेरिका द्वारा प्रस्तावित १५% वैश्विक आयात शुल्क ने पहले ही बुवाई की उम्मीदों को बदलना शुरू कर दिया है, जहां कपास की कीमत पर सोयाबीन के विस्तार का अनुमान है। चीन में, शिनजियांग प्रांत में रिकॉर्ड कपास की पैदावार के बावजूद, सरकार ने अपना कुल जीडीपी लक्ष्य पहली बार ५% से नीचे रखा है, जो वैश्विक मांग में संभावित गिरावट का संकेत है।

इस अस्थिरता के बावजूद, कुछ क्षेत्रों में रिकॉर्ड उत्पादन देखा जा रहा है। २०२५/२६ सीजन के लिए ब्राजील का सोयाबीन उत्पादन १८० मिलियन मीट्रिक टन होने का अनुमान है, जो पिछले वर्ष से ५% अधिक है। हालांकि, लॉजिस्टिक समस्याओं और भारी बारिश ने वहां निर्यात को धीमा कर दिया है, जिससे अर्जेंटीना के लिए अवसर पैदा हुआ है, जो वर्तमान में प्रति माह लगभग ४ मिलियन टन गेहूं का निर्यात कर रहा है।

खाद्य सुरक्षा अब एक प्राथमिक राष्ट्रीय रक्षा प्राथमिकता बनती जा रही है। खाड़ी देशों जैसे आयात-निर्भर क्षेत्र इन बाधाओं के प्रति विशेष रूप से संवेदनशील हैं। वैश्विक कृषि समुदाय के लिए, अगले कुछ महीने इन उच्च इनपुट लागतों और तेजी से बदलते व्यापार गठबंधनों के बीच तालमेल बिठाने की चुनौती लेकर आएंगे।