महाराष्ट्र ने पशुपालन क्षेत्र को दिया कृषि का दर्जा, ग्रामीण उद्यमिता को मिलेगा बढ़ावा
महाराष्ट्र सरकार ने पशुपालन क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर कृषि का दर्जा दे दिया है। परली वैजनाथ में महा पशुधन एक्सपो 2026 में घोषित यह निर्णय पशुपालकों के लिए आसान ऋण, सब्सिडी और नीतिगत लाभ सुनिश्चित करेगा, जिससे ग्रामीण उद्यमिता मजबूत होगी।
महाराष्ट्र सरकार ने ग्रामीण आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से पशुपालन क्षेत्र को आधिकारिक तौर पर कृषि का दर्जा प्रदान किया है। इस मान्यता के साथ, डेयरी, मुर्गी पालन और बकरी पालन जैसी गतिविधियों को अब वही वित्तीय लाभ मिलेंगे जो पारंपरिक खेती को मिलते हैं। इसकी घोषणा महा पशुधन एक्सपो 2026 के दौरान की गई।
इस निर्णय से पशुपालकों को रियायती ब्याज दरों पर कृषि ऋण मिल सकेगा। पहले, कई उद्यमियों को किफायती ऋण प्राप्त करने में चुनौतियों का सामना करना पड़ता था। अब डेयरी शेड, चारा भंडारण और आधुनिक पशु चिकित्सा सेवाओं जैसे बुनियादी ढांचे के लिए वित्त पोषण आसान हो जाएगा।
नई नीति में सब्सिडी सहायता भी शामिल है, जिसमें बुनियादी ढांचे के विकास के लिए 50 प्रतिशत तक की मदद का प्रावधान है। टीकाकरण अभियान और कोल्ड-चेन सुविधाओं के लिए वित्तीय सहायता से उत्पादकता में काफी वृद्धि होगी, जिससे राज्य में दूध और मांस की स्थिर आपूर्ति सुनिश्चित होगी।
पशुपालन को कृषि के अभिन्न अंग के रूप में पहचानना ग्रामीण अर्थव्यवस्था के बदलते स्वरूप को दर्शाता है। महाराष्ट्र के कई हिस्सों में, डेयरी से होने वाली आय सूखे या बाजार की अस्थिरता के दौरान किसानों को वित्तीय स्थिरता प्रदान करती है और जोखिम को कम करती है।
कुल मिलाकर, यह नीतिगत सुधार ग्रामीण उद्यमिता और रोजगार के अवसरों को बढ़ावा देगा। बेहतर संस्थागत सहायता के साथ, पशुपालक अपनी गतिविधियों को बड़े पैमाने पर बढ़ा सकते हैं और आधुनिक तकनीकों को अपनाकर राज्य की कृषि वृद्धि में प्रभावी योगदान दे सकते हैं।