पुणे जिले में कपास की खेती का रकबा बढ़ा – दौंड तालुका सबसे आगे
इस साल पुणे जिले में कपास की खेती में 74% की वृद्धि हुई है, जिसमें दौंड तालुका सबसे आगे है। अनुकूल मौसम, बाज़ार तक बेहतर पहुंच और कीट नियंत्रण उपायों से किसानों की रुचि बढ़ी है।
पुणे जिले में इस खरीफ सीजन के दौरान कपास की खेती में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है। पिछले वर्ष की तुलना में कपास के रकबे में 74% की बढ़ोतरी हुई है। पिछले साल जहां 1,122 हेक्टेयर में कपास बोया गया था, वहीं इस साल यह क्षेत्रफल करीब 1,945 हेक्टेयर तक पहुँच गया है। यह विस्तार किसानों और क्षेत्रीय कृषि अर्थव्यवस्था दोनों के लिए सकारात्मक माना जा रहा है।
दौंड तालुका कपास खेती विस्तार में सबसे आगे रहा है। इस क्षेत्र के किसानों ने अनुकूल मौसम और बाज़ार की स्थिर मांग के कारण अन्य परंपरागत फसलों से हटकर कपास की ओर रुख किया है। बारामती, शिरूर और इंदापुर तालुकों में भी सकारात्मक रुझान दिखाई दिए हैं, लेकिन दौंड सबसे प्रमुख केंद्र के रूप में उभरा है।
कपास खेती में वृद्धि का एक बड़ा कारण अच्छी वर्षा और कीट नियंत्रण से संबंधित सरकारी कार्यक्रम रहे हैं। पिछले वर्षों में गुलाबी सुंडी जैसे कीटों और अस्थिर मानसून ने कपास किसानों की परेशानी बढ़ा दी थी। लेकिन इस बार समय पर हस्तक्षेप और जागरूकता कार्यक्रमों ने किसानों का विश्वास बढ़ाया है।
बाज़ार तक आसान पहुंच ने भी कपास खेती को बढ़ावा दिया है। पुणे की नज़दीकी व्यापारिक मंडियों और कपड़ा उद्योग इकाइयों के कारण किसानों को उचित दाम मिलना आसान हुआ है। कपड़ा मिलों और निर्यातकों की बढ़ती मांग ने भी किसानों को इस फसल में निवेश करने के लिए प्रेरित किया है।
आगे देखते हुए, किसान उम्मीद कर रहे हैं कि कपास की बढ़ती खेती से उनकी आर्थिक स्थिति मजबूत होगी। हालांकि, कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि दीर्घकालिक लाभ के लिए सतत कीट निगरानी, संतुलित उर्वरक उपयोग और बेहतर जल प्रबंधन आवश्यक है। यदि सरकार से निरंतर सहयोग और प्रशिक्षण मिलता रहा, तो पुणे जिले की यह पहल अन्य जिलों के लिए भी उदाहरण बन सकती है।