विदर्भ में आधुनिक संतरा प्रसंस्करण केंद्रों के लिए 2 वर्ष का विस्तार मंजूर
महाराष्ट्र सरकार ने विदर्भ में आधुनिक संतरा प्रसंस्करण केंद्र स्थापित करने के लिए 2 वर्ष का विस्तार दिया है। यह निर्णय किसानों की आय बढ़ाने, फसल की बर्बादी घटाने और संतरे के बेहतर विपणन को बढ़ावा देने के लिए लिया गया है।
महाराष्ट्र सरकार ने विदर्भ क्षेत्र में आधुनिक संतरा प्रसंस्करण केंद्रों की स्थापना के लिए 2 वर्ष का विस्तार दिया है। यह कदम संतरा उत्पादक किसानों को राहत देने के उद्देश्य से उठाया गया है, जिन्हें अक्सर बाजार में उतार-चढ़ाव और कटाई के बाद होने वाले नुकसान का सामना करना पड़ता है। इन केंद्रों की स्थापना से भंडारण, वैल्यू एडिशन और प्रसंस्करण क्षमता में सुधार होगा, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलेगा।
विदर्भ के संतरा किसानों को अक्सर अधिक उत्पादन के समय कम दाम, फलों की शीघ्र खराब होने की समस्या और कोल्ड चेन सुविधाओं की कमी का सामना करना पड़ता है। इस विस्तार से रुके हुए प्रोजेक्ट्स को दोबारा गति मिलेगी। नए केंद्रों में ग्रेडिंग, वैक्सिंग, जूस, पल्प और पैकेजिंग की सुविधाएँ उपलब्ध होंगी, जिससे संतरे देशी और विदेशी बाजारों में और अधिक प्रतिस्पर्धी बनेंगे।
नागपुर और अमरावती जिले विशेष रूप से भारत के साइट्रस उत्पादन में महत्वपूर्ण योगदान करते हैं। लेकिन प्रसंस्करण इकाइयों की कमी के कारण बड़ी मात्रा में संतरे या तो बर्बाद हो जाते हैं या बेहद कम दाम पर बिकते हैं। आधुनिक प्रसंस्करण केंद्र किसानों को अपने उत्पाद का शेल्फ लाइफ बढ़ाने और जूस, मुरब्बा जैसे वैल्यू एडेड प्रोडक्ट्स के जरिए नई बाजार संभावनाएँ खोलने में मदद करेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि इन सुविधाओं से संतरे की कीमतें स्थिर होंगी और किसान एक टिकाऊ कृषि मूल्य श्रृंखला का हिस्सा बन पाएंगे। साथ ही, भारतीय संतरे और उनके प्रसंस्कृत उत्पादों की माँग अंतरराष्ट्रीय बाजारों में भी बढ़ेगी। यह कदम न केवल किसानों की आय बढ़ाएगा बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार भी सृजित करेगा।
सरकार का कहना है कि इन केंद्रों की सफलता के लिए किसानों को प्रशिक्षण, परिवहन ढाँचे का विकास और एग्री-एक्सपोर्ट जोन से जुड़ाव भी जरूरी होगा। यदि इसे सही ढंग से लागू किया गया, तो यह विदर्भ के संतरा क्षेत्र को एक बड़े निर्यात और प्रसंस्करण हब में बदल सकता है।