सतारा में प्री-मानसून का कहर: ओलावृष्टि और भारी बारिश से आम के बाग और संपत्ति तबाह
बुधवार देर शाम सतारा शहर और उसके आसपास के तालुकों में बिजली और तेज हवाओं के साथ आए शक्तिशाली प्री-मानसून तूफान ने भारी तबाही मचाई। हालांकि किसी जानमाल के नुकसान की खबर नहीं है, लेकिन तूफान ने पेड़ों को उखाड़ दिया, वाहनों और दुकानों को क्षतिग्रस्त कर दिया और क्षेत्र में आम की फसल को संकट में डाल दिया है।
बुधवार, 22 अप्रैल 2026 की शाम सतारा जिले के निवासियों के लिए आफत बनकर आई। जिले में बिजली और तेज हवाओं के साथ आए हिंसक प्री-मानसून तूफान ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया। शेंद्रे, लिंब और किडगांव सहित कई क्षेत्रों में भारी बारिश और ओलावृष्टि हुई। शेंद्रे क्षेत्र में ओलावृष्टि लगभग 30 मिनट तक जारी रही, जिससे खेतों में सफेद चादर बिछ गई और किसानों में हड़कंप मच गया।
कृषि पर इसका प्रभाव विशेष रूप से सतारा शहर के पास के आम उत्पादकों के लिए चिंताजनक है। फल पकने के अंतिम चरण में थे, ऐसे में तेज हवाओं और ओलों के कारण बड़े पैमाने पर 'फ्रूट ड्रॉप' हुआ है, जिससे बागवानों के मुनाफे को भारी नुकसान पहुंचने की आशंका है। खेतों के अलावा, बुनियादी ढांचे को भी नुकसान पहुँचा है। किडगांव में हवा इतनी शक्तिशाली थी कि दत्तनगर में एक बस स्टॉप उखड़कर सड़क पर जा गिरा। सतारा-मेढा मार्ग पर बेबलेवाड़ी फाटा के पास बड़े पेड़ गिरने से यातायात घंटों बाधित रहा।
पूरे जिले में संपत्ति का नुकसान व्यापक रहा:
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लिंब क्षेत्र: होटल 'ग्रीन चिली' के पास एक विशाल बरगद का पेड़ गिर गया, जिससे टीन की छत वाला शेड नष्ट हो गया और तीन मोटरसाइकिलें दब गईं।
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गोवे गाँव: अमोल जाधव की कार पर पेड़ गिरने से वह बुरी तरह क्षतिग्रस्त हो गई।
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कराड़ (शामगांव): मंगलवार आधी रात को बिजली गिरने से भारी नुकसान हुआ। इसने जिला सहकारी बैंक टॉवर के कनेक्टिविटी सिस्टम, यूपीएस और मीटर को नष्ट कर दिया और कई घरों के बिजली उपकरण जल गए।
यद्यपि प्रशासन अभी नुकसान का पूरा आकलन कर रहा है, लेकिन इन "वलिव" (प्री-मानसून) फुहारों ने स्थानीय जलवायु की अनिश्चितता को फिर से उजागर किया है। किसान अब जल्द से जल्द 'पंचनामा' कराने की मांग कर रहे हैं ताकि वे फसल और संपत्ति के लिए बीमा का दावा कर सकें। आने वाले दिनों में पश्चिमी महाराष्ट्र में और बारिश की संभावना को देखते हुए जिला हाई अलर्ट पर है।