महाराष्ट्र बजट 2026-27: कृषि विकास दर 3.4% रहने का अनुमान; किसानों के लिए 'एग्रीकल्चर एआई नीति' का ऐलान
मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज महाराष्ट्र का बजट पेश किया, जिसमें 2026-2029 के लिए विशेष "कृषि एआई नीति" पर जोर दिया गया है। राज्य की विकास दर 7.9% रहने की उम्मीद है, लेकिन कृषि क्षेत्र में विकास की गति धीमी (3.4%) रहने का अनुमान लगाया गया है।
महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस ने आज राज्य का बजट 2026-27 पेश किया। इस बजट में खेती को आधुनिक तकनीक से जोड़ने के लिए 'कृषि एआई नीति 2026-2029' की घोषणा की गई है। राज्य की अर्थव्यवस्था की कुल विकास दर 7.9% रहने का अनुमान है, लेकिन कृषि और संबद्ध क्षेत्रों में यह दर केवल 3.4% रहने की संभावना है। पिछले वर्ष हुई बेमौसम बारिश और बाढ़ के कारण किसानों को हुए नुकसान की भरपाई के लिए सरकार ने ₹9,400 करोड़ का वितरण किया है।
नई एआई नीति के माध्यम से सरकार लगभग दो करोड़ किसानों को सीधे मोबाइल पर मौसम, मिट्टी की सेहत और खाद के सही उपयोग की जानकारी देगी। मुख्यमंत्री के अनुसार, इस तकनीक का मुख्य उद्देश्य किसानों की लागत को कम करना और उनकी आय में स्थिरता लाना है। यह नीति विशेष रूप से उन क्षेत्रों के लिए तैयार की गई है जो बारिश पर निर्भर हैं।
बाजार की स्थिति को देखते हुए, सरकार ने कपास खरीद की अंतिम तिथि बढ़ाकर 15 मार्च 2026 कर दी है। खुले बाजार में कपास की कीमतें न्यूनतम समर्थन मूल्य (₹8,110) से नीचे गिरने के कारण किसानों को राहत देने के लिए यह फैसला लिया गया है। अब तक राज्य में 113 लाख क्विंटल कपास की सरकारी खरीद हो चुकी है, जिसके बदले किसानों को ₹9,020 करोड़ का भुगतान किया गया है।
चीनी उद्योग को बढ़ावा देने के लिए भी बजट में विशेष प्रावधान किए गए हैं। घाटे में चल रही सहकारी चीनी मिलों को पुनर्जीवित करने के लिए 'बीओटी' (Build-Operate-Transfer) मॉडल के तहत निजी निवेशकों के साथ काम करने की अनुमति दी गई है। मार्च की शुरुआत तक राज्य की 113 मिलों ने अपना पेराई सीजन समाप्त कर लिया है, और कुल चीनी उत्पादन 950.31 लाख क्विंटल दर्ज किया गया है।
हालांकि, किसान संगठनों का मानना है कि केवल तकनीक के माध्यम से समस्याओं का समाधान नहीं होगा। उन्होंने सरकार से स्वामीनाथन आयोग की 'C2+50' सिफारिशों को लागू करने की मांग की है, ताकि फसलों का लाभकारी मूल्य मिल सके और विदर्भ व मराठवाड़ा जैसे क्षेत्रों में किसानों की आत्महत्या की घटनाओं पर लगाम लगाई जा सके।