वैश्विक अनाज बाजार: रिकॉर्ड उत्पादन और नए अमेरिकी शुल्कों के कारण गेहूं की कीमतें $5.70 से नीचे

अर्जेंटीना और ऑस्ट्रेलिया से रिकॉर्ड फसल के कारण वैश्विक गेहूं बाजार में गिरावट आई है। वहीं, अमेरिका द्वारा लागू १०-१५% नए शुल्कों ने चीन जैसे बड़े देशों के साथ वैश्विक व्यापार युद्ध की चिंताओं को बढ़ा दिया है।

मार्च 4, 2026 - 09:17
 1
वैश्विक अनाज बाजार: रिकॉर्ड उत्पादन और नए अमेरिकी शुल्कों के कारण गेहूं की कीमतें $5.70 से नीचे
अर्जेंटीना के एक विशाल अनाज गोदाम से जहाज में गेहूं लोड होने का दृश्य, साथ ही अमेरिकी गेहूं वायदा बाजार में गिरावट दिखाता ग्राफ।

अंतर्राष्ट्रीय गेहूं बाजार में आज, 4 मार्च 2026 को बड़ी गिरावट दर्ज की गई और कीमतें $5.70 प्रति बुशेल के नीचे आ गईं। कुछ हफ़्ते पहले कीमतों में आई तेजी अब दक्षिणी गोलार्ध से आने वाली भारी आपूर्ति के कारण थम गई है। अर्जेंटीना वर्तमान में रिकॉर्ड 2.77 करोड़ टन फसल का निर्यात कर रहा है, जबकि ऑस्ट्रेलिया ने अनुकूल बारिश के बाद अपने निर्यात अनुमान को बढ़ा दिया है। बाजार में अनाज की प्रचुरता ने कीमतों पर नीचे की ओर दबाव बनाया है।

आपूर्ति के साथ-साथ मजबूत अमेरिकी डॉलर और वाशिंगटन की नई व्यापार नीतियों ने भी अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के लिए अमेरिकी अनाज को महंगा कर दिया है। अमेरिकी प्रशासन ने अधिकांश आयातों पर 10% सामान्य शुल्क और कुछ कृषि उत्पादों पर 15% तक शुल्क लागू किया है। इस नीति से आयातित खाद और कृषि मशीनरी की लागत बढ़ने की आशंका है, जिससे किसानों के मुनाफे पर असर पड़ सकता है।

इन व्यापार बाधाओं के जवाब में भू-राजनीतिक तनाव भी बढ़ रहे हैं। चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा अनाज उपभोक्ता है, अमेरिकी सोयाबीन और मक्का निर्यात को निशाना बना सकता है। बीजिंग अपनी नई पंचवार्षिक योजना में 'खाद्य आत्मनिर्भरता' को प्राथमिकता दे रहा है और अमेरिका पर निर्भरता कम करने के लिए दक्षिण अमेरिकी और रूसी स्रोतों से अनाज मंगा रहा है।

यूरोप और मध्य पूर्व में भी इसके प्रभाव देखे जा रहे हैं। अमेरिकी गेहूं महंगा होने के कारण उत्तर अफ्रीका के देश अब रूस और ब्लैक सी क्षेत्र से अनाज खरीद रहे हैं। रूस से मिलने वाला सस्ता अनाज फिलहाल वैश्विक कीमतों को बढ़ने नहीं दे रहा है। व्यापारी अब वैश्विक कूटनीतिक वार्ताओं पर नजर गड़ाए हुए हैं।

2026 के लिए व्यापक दृष्टिकोण "कृषि क्षेत्रवाद" की ओर इशारा कर रहा है, जहां देश अब द्विपक्षीय समझौतों को अधिक महत्व दे रहे हैं। कनाडा, चीन और रूस जैसे देश अमेरिकी शुल्कों का मुकाबला करने के लिए नए व्यापार गुट बना रहे हैं। वैश्विक अनाज का प्रवाह स्थायी रूप से बदल रहा है, जिसका अर्थ है कि किसानों को अब न केवल अपनी उपज बल्कि वैश्विक मुद्रा और भू-राजनीतिक बदलावों पर भी लगातार नजर रखनी होगी।