महाराष्ट्र सरकार ने डब्ल्यूओटीआर सेंटर फॉर रेजिलियंस स्टडीज़ के साथ समझौता किया
महाराष्ट्र सरकार ने जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य और किसानों की क्षमता निर्माण को बढ़ावा देने के लिए WOTR सेंटर फॉर रेजिलियंस स्टडीज़ के साथ समझौता किया है। यह पहल जलवायु-संवेदनशील खेती और सतत ग्रामीण विकास पर केंद्रित होगी।
महाराष्ट्र सरकार ने डब्ल्यूओटीआर सेंटर फॉर रेजिलियंस स्टडीज़ (W-CReS) के साथ समझौता किया है, जिसका उद्देश्य जलवायु-संवेदनशील खेती को बढ़ावा देना और सतत ग्रामीण विकास सुनिश्चित करना है। यह समझौता किसानों को बदलते मौसम, अनियमित वर्षा और संसाधनों की कमी जैसी चुनौतियों से उबरने में मदद करेगा।
यह सहयोग जल संरक्षण, मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन और किसान शिक्षा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों पर केंद्रित रहेगा। राज्य, जो अक्सर सूखे और असमय बारिश से प्रभावित होता है, अब नवोन्मेषी उपायों की तलाश में है। इस MoU के तहत विशेष कार्यक्रम चलाए जाएंगे जिनमें आधुनिक सिंचाई तकनीक, जैविक खेती और क्षतिग्रस्त भूमि की बहाली को बढ़ावा मिलेगा।
किसानों की क्षमता निर्माण इस समझौते का अहम हिस्सा है। किसानों को प्रशिक्षण, डिजिटल अभियान और फील्ड स्कूल के जरिए जलवायु-स्मार्ट कृषि तकनीक की जानकारी दी जाएगी। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे न केवल उत्पादन क्षमता बढ़ेगी, बल्कि किसानों की आमदनी और स्थिरता भी सुनिश्चित होगी। महिला किसानों और वंचित समुदायों को भी इसका लाभ मिलेगा।
WOTR सेंटर फॉर रेजिलियंस स्टडीज़ लंबे समय से ग्रामीण समुदायों में जलवायु अनुकूलन पर शोध कर रहा है। इस सहयोग से शोध-आधारित समाधान राज्य की नीतियों में शामिल किए जाएंगे। इससे महाराष्ट्र की कृषि रीढ़ मजबूत होगी और भारत के सतत विकास लक्ष्यों को भी बढ़ावा मिलेगा।
अधिकारियों का कहना है कि यह समझौता केवल दस्तावेज़ नहीं बल्कि भविष्य की दिशा है। सरकार और विशेषज्ञ संस्थान के तालमेल से महाराष्ट्र अन्य राज्यों के लिए एक उदाहरण प्रस्तुत करेगा। किसान संगठनों ने इसका स्वागत करते हुए कहा कि यदि समय पर लागू किया गया तो इसका बड़ा लाभ किसानों को मिलेगा।