खेती में डिजिटल क्रांति: चीन ने शुरू की AI-आधारित कृषि जनगणना; ब्रिटेन में टैक्स बदलाव से किसानों में मची खलबली
चीन ने डेटा के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए 'रिमोट सेंसिंग' और AI का उपयोग करके हाई-टेक राष्ट्रीय कृषि जनगणना लागू करने का नया फरमान जारी किया है। वहीं, ब्रिटेन के किसान परिवारों के पास नए 'कृषि संपत्ति राहत' (APR) नियमों के लागू होने से पहले अपनी संपत्तियों के पुनर्गठन के लिए 6 अप्रैल, 2026 तक का समय है।
वैश्विक कृषि क्षेत्र आज, 31 मार्च, 2026 को एक बड़े विनियामक और तकनीकी बदलाव का गवाह बन रहा है। चीन में, प्रधान मंत्री ली कियांग ने १ मई, २०२६ से प्रभावी होने वाली 'राष्ट्रीय कृषि जनगणना' के संशोधित नियमों पर हस्ताक्षर किए हैं। यह चौथी राष्ट्रीय जनगणना मैन्युअल रिपोर्टिंग के बजाय उन्नत 'रिमोट सेंसिंग' तकनीक पर आधारित होगी, ताकि अनाज उत्पादन और ग्रामीण क्षेत्रों में "नई गुणवत्ता वाली उत्पादक शक्तियों" की सटीक तस्वीर मिल सके। चीन ने इस साल ७२५ मिलियन टन अनाज के उत्पादन का लक्ष्य रखा है, इसलिए आंकड़ों के फर्जीवाड़े को रोकने के लिए कड़े दंड के प्रावधान किए गए हैं।
अटलांटिक के पार, यूनाइटेड किंगडम (UK) में कृषि स्वामित्व के मामले में दशकों का सबसे बड़ा बदलाव होने जा रहा है। ६ अप्रैल, २०२६ से 'कृषि संपत्ति राहत' (APR) नियमों में सुधार लागू होने में अब एक सप्ताह से भी कम समय बचा है। नए नियमों के तहत, १००% विरासत कर राहत अब प्रति व्यक्ति २.५ मिलियन पाउंड तक सीमित होगी, जो पहले असीमित थी। इसके कारण किसान परिवार अपनी संपत्ति को ट्रस्ट में स्थानांतरित करने या अपने जीवनसाथी के नाम करने के लिए जल्दबाजी कर रहे हैं ताकि पुरानी उदार प्रणाली का लाभ उठाया जा सके।
भारत में, इजराइल के साथ साझेदारी अब प्रदर्शन केंद्रों से आगे बढ़कर "विलेज ऑफ एक्सीलेंस" (VoE) पहल तक पहुँच गई है। एक उच्च स्तरीय द्विपक्षीय बैठक में घोषित इस चरण का लक्ष्य इजराइल की सटीक खेती (Precision farming), सूक्ष्म सिंचाई और उपग्रह-आधारित फसल विश्लेषण तकनीक को सीधे १०० भारतीय गांवों में लागू करना है। इसका उद्देश्य जमीनी स्तर पर तकनीकी बदलाव लाकर महाराष्ट्र और कर्नाटक जैसे राज्यों के छोटे किसानों की आय में २०-३०% की वृद्धि करना है।
इस बीच, रूस ने गेहूं के निर्यात शुल्क (Export Duty) में भारी वृद्धि की है। आज तक यह शुल्क ५१५.६ RUB प्रति टन तक पहुँच गया है। रूस ने घरेलू बाजार में रोटी की कीमतों को स्थिर रखने के लिए यह कदम उठाया है। रूस के इस प्रतिबंधात्मक कदम के कारण कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में गेहूं की वैश्विक कीमतों में १०-१२ डॉलर प्रति टन की उछाल आई है, क्योंकि वैश्विक खरीदार अब वैकल्पिक आपूर्तिकर्ताओं की तलाश कर रहे हैं।
अंत में, ऑस्ट्रेलिया अपने पशुधन और अनाज क्षेत्र में रिकॉर्ड उत्पादन का जश्न मना रहा है। USDA के आंकड़ों के अनुसार, ऑस्ट्रेलिया का जौ (Barley) उत्पादन १६.३ मिलियन मेट्रिक टन के रिकॉर्ड स्तर पर पहुँच गया है। साथ ही गेहूं का उत्पादन भी ऐतिहासिक रूप से उच्च स्तर पर है। ऐसे समय में जब अर्जेंटीना जैसे देशों में बारिश की कमी के कारण पैदावार घटी है, ऑस्ट्रेलिया की यह बम्पर फसल वैश्विक खाद्य बाजार के लिए एक महत्वपूर्ण सुरक्षा कवच प्रदान कर रही है।