हिमाचल में देश का पहला राज्य-समर्थित बायोचार कार्यक्रम प्रारंभ

मुख्यमंत्री सुक्खू ने हिमाचल में देश का पहला राज्य-समर्थित बायोचार प्रोग्राम लॉन्च किया। छह माह में नेरी (हमीरपुर) में संयंत्र स्थापित होगा जिससे जंगल की आग, कार्बन क्रेडिट्स तथा पुनरुत्थान में मदद मिलेगी।

अगस्त 28, 2025 - 13:31
अगस्त 28, 2025 - 13:35
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हिमाचल में देश का पहला राज्य-समर्थित बायोचार कार्यक्रम प्रारंभ

शिमला, हिमाचल प्रदेश ने आज एक ऐतिहासिक कदम उठाते हुए देश का पहला राज्य-समर्थित बायोचार कार्यक्रम शुरू किया। मुख्यमंत्री सुखविंदर सिंह सुक्खू ने इसे “हरित नवाचार की दिशा में भारत के लिए आदर्श मॉडल” बताया।

त्रिपक्षीय समझौता

यह योजना डॉ. वाई.एस. परमार कृषि एवं वानिकी विश्वविद्यालय, वन विभाग और चेन्नई स्थित ProClime Services Pvt. Ltd. के बीच त्रिपक्षीय समझौते के तहत लागू होगी। छह माह के भीतर हमीरपुर जिले के नेरी में संयंत्र स्थापित किया जाएगा। विश्वविद्यालय ने इसके लिए तीन एकड़ भूमि दी है, जबकि वन विभाग सुरक्षित बायोमास संग्रह सुनिश्चित करेगा।

क्यों आवश्यक है बायोचार?

हिमाचल के जंगलों में हर वर्ष पाइन की सूखी सुईयों से भीषण आग लगती है। इसके साथ ही लैंटाना और बांस जैसी प्रजातियाँ पारिस्थितिक तंत्र को बाधित करती हैं। इनका वैज्ञानिक उपयोग कर बायोचार बनाया जाएगा—जो मिट्टी की उर्वरता बढ़ाने, नमी संरक्षित करने और कार्बन भंडारण में सहायक है।

समुदाय और रोजगार

गाँवों के लोग जो बायोमास संग्रह करेंगे उन्हें ₹2.50 प्रति किलो भुगतान किया जाएगा। इसके साथ गुणवत्ता और मात्रा के अनुसार प्रोत्साहन भी मिलेगा। योजना से प्रतिवर्ष 50,000 व्यक्ति-दिन का रोजगार सृजित होने का अनुमान है।

आर्थिक व पर्यावरणीय लाभ

अगले दस वर्षों में परियोजना से 28,800 कार्बन क्रेडिट्स उत्पन्न होंगे, जिन्हें अंतरराष्ट्रीय बाजार में बेचकर राज्य नई हरित परियोजनाओं के लिए फंड जुटा सकेगा। जंगल की आग में कमी से अरबों रुपये की प्राकृतिक क्षति रोकी जा सकेगी।

प्रशिक्षण व अनुसंधान

विश्वविद्यालय व वन विभाग मिलकर किसानों को बायोचार उपयोग, सुरक्षित संग्रहण तकनीक और जलवायु अनुकूल खेती का प्रशिक्षण देंगे। इससे खेती में रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता घटेगी और उत्पादकता बढ़ेगी।

मुख्यमंत्री का दृष्टिकोण

CM सुक्खू ने कहा कि यह पहल हिमाचल को हरित ऊर्जा राज्य बनाने की दिशा में बड़ा कदम है। यह कार्यक्रम पर्यावरण और अर्थव्यवस्था—दोनों के लिए लाभकारी है।

भविष्य की योजना

यदि नेरी संयंत्र सफल हुआ तो राज्य के अन्य जिलों में भी ऐसे प्लांट लगाए जाएंगे। सरकार निजी क्षेत्र और शोध संस्थानों के साथ मिलकर बायो-इकोनॉमी का विस्तार करने की योजना बना रही है।

लाभ:

  • जंगल में आग का खतरा कम होगा

  • खेतों की उर्वरता में सुधार

  • कार्बन क्रेडिट्स से आर्थिक लाभ

  • ग्रामीण रोजगार एवं कौशल विकास को संवर्द्धन