स्मार्ट खेती को बढ़ावा देने के लिए महाराष्ट्र करेगा "AI for Agriculture 2026" ग्लोबल समिट की मेजबानी
महाराष्ट्र खेती में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डिजिटल टूल्स और स्मार्ट तकनीकों के उपयोग को बढ़ावा देने के लिए "AI for Agriculture 2026" ग्लोबल समिट की मेजबानी करने जा रहा है। इसका उद्देश्य उत्पादकता में सुधार, लागत में कमी और किसानों की आय को मजबूत करना है।
महाराष्ट्र सरकार 22-23 फरवरी 2026 को मुंबई के जियो वर्ल्ड कन्वेंशन सेंटर में "AI for Agri 2026" ग्लोबल समिट का आयोजन करने जा रही है। यह शिखर सम्मेलन महाराष्ट्र की महत्वाकांक्षी 'कृषि-AI नीति 2025-2029' का हिस्सा है। इस आयोजन का मुख्य उद्देश्य दुनिया भर के तकनीकी विशेषज्ञों, निवेशकों और कृषि वैज्ञानिकों को एक साथ लाना है ताकि भारतीय खेती की चुनौतियों का समाधान एआई (AI) के माध्यम से निकाला जा सके।
इस शिखर सम्मेलन में 'महाएग्री-एआई' (MahaAgri-AI) जैसी प्रमुख पहलों पर चर्चा होगी, जिसके लिए सरकार ने पहले चरण में 500 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यह नीति डेटा-संचालित कृषि पारिस्थितिकी तंत्र बनाने पर केंद्रित है। एआई की मदद से किसान सटीक भविष्यवाणियां कर सकेंगे, जिससे न केवल फसलों की पैदावार 30-40% तक बढ़ सकती है, बल्कि उर्वरकों और पानी के अनावश्यक उपयोग में भी भारी कमी आएगी।
समिट के दौरान डिजिटल इंफ्रास्ट्रक्चर जैसे 'महाएग्रीएक्स' (MahaAgriX - डेटा एक्सचेंज प्लेटफार्म) और किसानों के लिए एआई-आधारित सलाहकार प्लेटफार्म 'महाविस्तार' का प्रदर्शन किया जाएगा। ये तकनीकें किसानों को उनके मोबाइल पर ही मिट्टी की नमी, कीटों के हमले की चेतावनी और बाजार की कीमतों की सटीक जानकारी देंगी। इससे छोटे और सीमांत किसानों की निजी व्यापारियों पर निर्भरता कम होगी।
चूंकि संयुक्त राष्ट्र ने 2026 को 'अंतर्राष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' घोषित किया है, इस समिट में महिला किसानों के सशक्तिकरण और एआई तकनीक तक उनकी पहुंच पर विशेष सत्र आयोजित किए जाएंगे। समावेशी एआई (Inclusive AI) के माध्यम से यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तकनीक का लाभ समाज के हर वर्ग तक पहुंचे और ग्रामीण क्षेत्रों में डिजिटल विभाजन कम हो।
वैश्विक संस्थानों जैसे विश्व आर्थिक मंच (WEF), विश्व बैंक और बिल एंड मेलिंडा गेट्स फाउंडेशन के सहयोग से आयोजित यह शिखर सम्मेलन महाराष्ट्र को एग्री-टेक के क्षेत्र में एक ग्लोबल हब के रूप में स्थापित करेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि एआई के उपयोग से खेती न केवल अधिक लाभदायक बनेगी बल्कि जलवायु परिवर्तन के खतरों के प्रति भी अधिक लचीली (Resilient) होगी।