निर्यात संकट: अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष से महाराष्ट्र के केला और चीनी निर्यात पर लगा ब्रेक; १,२०० से अधिक कंटेनर फंसे

खाड़ी देशों में बढ़ते तनाव के कारण पश्चिमी महाराष्ट्र के कृषि निर्यात में भारी गिरावट आई है। सोलापुर से केले के १,२०० कंटेनर और ७०० चीनी ट्रक बंदरगाहों पर फंसे हुए हैं, जिससे करोड़ों के नुकसान की आशंका है।

मार्च 5, 2026 - 08:57
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निर्यात संकट: अमेरिका-इजरायल-ईरान संघर्ष से महाराष्ट्र के केला और चीनी निर्यात पर लगा ब्रेक; १,२०० से अधिक कंटेनर फंसे
बंदरगाह के कोल्ड स्टोरेज में खड़े केले के कंटेनर और चिंतित किसान समूह।

अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य संघर्ष ने महाराष्ट्र के कृषि निर्यात इंजन को बड़ा झटका दिया है। सोलापुर जिले के करमाला में लगभग १,२०० केले के कंटेनर वर्तमान में कोल्ड स्टोरेज में फंसे हुए हैं। रोजाना होने वाली १,२०० टन केले की कटाई पिछले ४८ घंटों से पूरी तरह बंद है क्योंकि खाड़ी क्षेत्र में जोखिम बढ़ने के कारण जहाजों की आवाजाही रुक गई है।

चीनी और गुड़ का निर्यात भी बुरी तरह प्रभावित हुआ है। वर्तमान में ७०० चीनी से लदे ट्रक विभिन्न बंदरगाहों पर खड़े हैं और उन्हें आगे जाने का रास्ता नहीं मिल रहा है। अंगूर और किशमिश जैसे जल्दी खराब होने वाले उत्पादों का भंडार भी बढ़ता जा रहा है, जिससे किसानों को भारी वित्तीय नुकसान का डर सता रहा है।

इतना ही नहीं, ईरान के बुशहर बंदरगाह तक पहुंच चुके कुछ शिपमेंट भी वापस मंगाए जा रहे हैं। खरीदारों की कमी के कारण स्थानीय मंडियों में माल की आवक बढ़ने की संभावना है, जिससे कीमतों में भारी गिरावट आ सकती है।

नीतिगत मोर्चे पर, महाराष्ट्र के कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने विधान परिषद में जानकारी दी कि नई ऋण माफी योजना पर विचार चल रहा है और इसकी रिपोर्ट अप्रैल में आएगी। सरकार ३० जून २०२६ तक इस पर अंतिम फैसला ले सकती है।

राज्य सरकार अब "माई एग्री" (My Agri) एआई नीति के माध्यम से ड्रोन और रोबोटिक्स के उपयोग पर जोर दे रही है ताकि वैश्विक बाजार की अनिश्चितताओं से निपटा जा सके। हालांकि, तत्काल राहत के लिए किसानों की नजरें व्यापारिक मार्गों के फिर से खुलने पर टिकी हैं।