मटार बाजार का नया केंद्र: रूस ने चीन की आपूर्ति श्रृंखला में कनाडा को पछाड़ा; ट्रेड टैरिफ से बदला समीकरण

रूस ने चीन के मटार (Peas) बाजार पर अपना दबदबा कायम कर लिया है, जहाँ कनाडाई आयात में ६०% की गिरावट के साथ रूस ने ४६% हिस्सेदारी हासिल की है। १ मार्च २०२६ से शुल्क हटाने के समझौते के बावजूद, रूसी कीमतों की प्रतिस्पर्धात्मकता कनाडा के लिए बड़ी बाधा बनी हुई है।

मार्च 7, 2026 - 09:26
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मटार बाजार का नया केंद्र: रूस ने चीन की आपूर्ति श्रृंखला में कनाडा को पछाड़ा; ट्रेड टैरिफ से बदला समीकरण
चीन को रूसी मटार निर्यात में वृद्धि (हरा तीर) और कनाडाई निर्यात में भारी गिरावट (लाल तीर) दर्शाता एक इन्फोग्राफिक।

वैश्विक दलहन (Pulses) व्यापार में एक बड़ा बदलाव देखा जा रहा है क्योंकि रूस ने आधिकारिक तौर पर चीन के बाजार में मटार के मुख्य आपूर्तिकर्ता के रूप में कनाडा को पीछे छोड़ दिया है। यह बदलाव २०२५ की शुरुआत में चीन द्वारा कनाडाई कृषि उत्पादों पर लगाए गए १००% शुल्क के कारण हुआ, जिसने कनाडा की बाजार हिस्सेदारी को समाप्त कर दिया। २०२४ में चीन के मटार आयात में कनाडा की हिस्सेदारी ४२% थी, जो २०२५ में लगभग ६०% गिर गई, जिससे रूसी निर्यातकों को ४६% बाजार पर कब्जा करने का मौका मिला।

रूस की यह बढ़त उसके भारी उत्पादन पर टिकी है। २०२५ में रूस की मटार की फसल रिकॉर्ड ५२ लाख टन रही, जो पिछले वर्ष की तुलना में ४०% अधिक है। इस बंपर पैदावार के कारण रूसी आपूर्तिकर्ता बहुत सस्ती कीमतों पर माल दे पा रहे हैं। वर्तमान में रूसी मटार लगभग $२५२/टन पर उपलब्ध हैं, जबकि कनाडाई निर्यातकों की कीमत $४५५/टन है। कीमतों का यह बड़ा अंतर रूस को चीनी खरीदारों का पसंदीदा साझेदार बना रहा है।

व्यापक भू-राजनीतिक परिदृश्य अंतरराष्ट्रीय व्यापार को और अधिक जटिल बना रहा है। अमेरिका ने मार्च २०२६ से चीन को भेजे जाने वाले अमेरिकी मक्का और गेहूं पर १५% शुल्क लागू किया है। साथ ही, कनाडा को ऊर्जा संसाधनों और पोटाश पर १०% अमेरिकी शुल्क का सामना करना पड़ रहा है, जिससे उत्तरी अमेरिकी कृषि आपूर्ति श्रृंखला बाधित हो सकती है।

अनाज क्षेत्र में, २०२६ के लिए शुरुआती अनुमान वैश्विक गेहूं उत्पादन में ३% की गिरावट का संकेत दे रहे हैं, जो लगभग ८१० मिलियन टन रह सकता है। यह मुख्य रूप से अमेरिका और रूस में किसानों द्वारा गेहूं के बजाय अधिक लाभदायक तिलहन की बुवाई को प्राथमिकता देने के कारण है। इसके विपरीत, भारत में रिकॉर्ड बुवाई और सरकारी प्रोत्साहन के कारण गेहूं की फसल अच्छी रहने की उम्मीद है।

जैसे-जैसे देश अपनी व्यापार रणनीतियों को बदल रहे हैं, खाद्य सुरक्षा राष्ट्रीय रक्षा का एक हिस्सा बन गई है। चीन ने अपने कृषि स्रोतों में विविधता लाने और आधुनिक कृषि तकनीक के आयात को बढ़ाने का संकल्प लिया है ताकि बाहरी व्यापार के झटकों को कम किया जा सके। २०२६ के बाकी महीनों में यह देखना दिलचस्प होगा कि क्या कनाडा जैसे पारंपरिक निर्यातक रूस की कम लागत वाली कृषि वस्तुओं के सामने अपनी पकड़ दोबारा बना पाते हैं।