चीनी की कीमतों में उछाल के आसार: रमजान की मांग और घटती आपूर्ति का असर; महाराष्ट्र का पेराई सीजन समाप्ति की ओर।

आगामी रमजान के दौरान भारी मांग और महाराष्ट्र के चीनी कोटे में १३.२२% की कटौती के कारण भारत में चीनी की कीमतों में बढ़ोतरी की उम्मीद है। महाराष्ट्र की कई मिलों के बंद होने से बाजार में चीनी की उपलब्धता कम हो रही है।

मार्च 12, 2026 - 09:00
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चीनी की कीमतों में उछाल के आसार: रमजान की मांग और घटती आपूर्ति का असर; महाराष्ट्र का पेराई सीजन समाप्ति की ओर।
महाराष्ट्र की एक शुगर फैक्ट्री में उच्च गुणवत्ता वाली सफेद चीनी को जूट के बोरों में भरने का क्लोज-अप शॉट। इमेज पर S-30 और M-30 ग्रेड की वर्तमान बाजार दरों का डिजिटल ओवरले।

पवित्र रमजान महीने के करीब आने और देशभर में मांग बढ़ने के साथ घरेलू चीनी बाजार में तेजी का रुख देखा जा रहा है। महाराष्ट्र में स्थिति और भी चुनौतीपूर्ण है क्योंकि कई चीनी मिलें अपने पेराई सीजन के अंत तक पहुंच रही हैं, जिससे ताजा आपूर्ति में कमी आ रही है। बाजार विशेषज्ञों का अनुमान है कि त्योहारी मांग और कम उत्पादन के इस तालमेल से आने वाले हफ्तों में कीमतें मजबूत रहेंगी।

केंद्र सरकार ने मार्च २०२६ के लिए कुल २२.५ लाख टन चीनी का कोटा घोषित किया है। हालांकि, राज्यों के आवंटन में महत्वपूर्ण बदलाव हुआ है। उत्तर प्रदेश का कोटा ६.७१% बढ़कर ७.५५ लाख टन हो गया है, जबकि महाराष्ट्र का कोटा १३.२२% घटाकर ८.१२ लाख टन कर दिया गया है (फरवरी में यह ९.३५ लाख टन था)। कोटे में इस कमी से राज्य में कीमतों पर और दबाव बढ़ने की संभावना है।

वर्तमान में, महाराष्ट्र में चीनी की कीमतें स्थिर या थोड़ी मजबूत बनी हुई हैं। S-30 ग्रेड ३,७०० से ३,७२० रुपये प्रति क्विंटल के बीच कारोबार कर रहा है, जबकि M-30 ग्रेड ३,८०० से ३,८२० रुपये प्रति क्विंटल के बीच है। इसकी तुलना में दक्षिण कर्नाटक में कीमतें काफी अधिक हैं, जहां M-30 ग्रेड ४,१७५ रुपये तक पहुंच गया है।

उत्तर प्रदेश और गुजरात जैसे अन्य राज्यों में भी कीमतें अलग-अलग हैं। यूपी में M-30 चीनी की कीमत ४,०३० से ४,१३० रुपये के बीच है, जबकि गुजरात में S-30 दरें ३,८११ से ३,८३१ रुपये के आसपास हैं। कोल्हापुर और अन्य प्रमुख केंद्रों के व्यापारी बाजार पर पैनी नजर रखे हुए हैं, क्योंकि आपूर्ति कम होने से त्योहारों से पहले खुदरा कीमतों में बढ़ोतरी हो सकती है।

पेराई सीजन खत्म होने के साथ अब चीनी उद्योग केंद्र सरकार के हस्तक्षेप की उम्मीद कर रहा है। हालांकि मौजूदा कीमतें उत्पादन लागत से जूझ रही मिलों को राहत दे रही हैं, लेकिन रमजान और गर्मियों के दौरान मिठाई और शीतल पेय महंगे होने से उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ सकता है।