नासिक में प्याज बफर स्टॉक से किसानों को भारी नुकसान – भुजबळ ने केंद्र से पुनर्विचार की मांग की
नासिक के किसान बफर स्टॉक जारी न होने से भारी नुकसान झेल रहे हैं। प्याज की कीमतें गिर गई हैं और मंत्री छगन भुजबळ ने केंद्र सरकार से नीति पर पुनर्विचार करने का आग्रह किया है।
नासिक, जो देश का प्याज उत्पादन केंद्र माना जाता है, इस समय एक गंभीर कृषि संकट का सामना कर रहा है। किसान भारी नुकसान झेल रहे हैं क्योंकि सरकारी एजेंसियों द्वारा रखे गए प्याज के बफर स्टॉक को अभी तक बाजार में नहीं उतारा गया है। इस देरी के चलते बाजार में कीमतें धड़ाम से गिर गई हैं और किसान अपनी लागत भी निकालने में असमर्थ हो रहे हैं।
कृषि एवं अन्न नागरी आपूर्ति मंत्री छगन भुजबळ ने इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया है। उनका कहना है कि बफर स्टॉक का उद्देश्य बाजार को स्थिर करना है, लेकिन जब इसे लंबे समय तक रोके रखा जाता है तो किसान नुकसान झेलते हैं और बाद में अचानक बाढ़ जैसे हालात पैदा हो जाते हैं। उन्होंने केंद्र सरकार से नीति पर पुनर्विचार करने और किसानों को राहत देने की मांग की है।
प्याज का संकट महाराष्ट्र में बार-बार उभरता है, जिसमें किसान और उपभोक्ता दोनों प्रभावित होते हैं। किसान कटाई के समय औने-पौने दाम पर प्याज बेचने को मजबूर होते हैं, जबकि बाद में उपभोक्ता ऊंचे दाम पर प्याज खरीदते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि भंडारण, समय पर रिलीज़ और पारदर्शी नीति की कमी इस समस्या का मुख्य कारण है।
नासिक के किसानों के लिए प्याज आजीविका का प्रमुख साधन है। उर्वरक, सिंचाई और मजदूरी की बढ़ती लागत के बीच जब बाजार भाव गिरते हैं तो छोटे और सीमांत किसान पूरी तरह टूट जाते हैं। यही कारण है कि अब किसान या तो निश्चित दाम पर सरकारी खरीद की मांग कर रहे हैं या बफर स्टॉक को तुरंत बाजार में उतारने की।
राज्य सरकार ने इस मुद्दे को केंद्र के सामने रखने का निर्णय लिया है। मंत्री भुजबळ का कहना है कि किसानों को बाजार की अस्थिरता और देर से लिए गए फैसलों के भरोसे नहीं छोड़ा जा सकता। अब समय है कि सरकार एक पारदर्शी और किसान-केंद्रित नीति अपनाए, ताकि हर बार प्याज संकट से किसानों को बचाया जा सके।