हरियाणा के जींद में 37% अधिक बारिश, धान की फसल बर्बाद
हरियाणा के जींद जिले में 2023 की तुलना में 37% अधिक बारिश दर्ज की गई है। इस भारी बारिश से धान की फसलें नष्ट हो गईं और कई गांव जलमग्न हो गए। किसानों को दोबारा बोआई करनी पड़ रही है और कृषि संकट गहराता जा रहा है।
हरियाणा के जींद जिले में इस साल मानसून ने पिछले वर्ष (2023) की तुलना में 37% अधिक बारिश दर्ज की है, जिससे खेती-बाड़ी और ग्रामीण जीवन बुरी तरह प्रभावित हुआ है। शुरुआती बारिश को किसानों ने राहत माना था, लेकिन लगातार भारी वर्षा ने धान की फसल को पूरी तरह तबाह कर दिया। निचले इलाकों में बसे कई गाँव पानी में डूब गए, जिससे परिवारों को अस्थायी रूप से सुरक्षित स्थानों पर शरण लेनी पड़ी।
जींद जिले के किसानों की हालत सबसे ज्यादा खराब है, क्योंकि धान की खड़ी फसल कटाई से ठीक पहले जलभराव में नष्ट हो गई। कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, धान एक अत्यधिक जल-संवेदनशील फसल है और लगातार जलभराव से जड़ों में सड़न फैल जाती है। इसके चलते कई किसानों की पूरी फसल बर्बाद हो गई है। बीज, खाद और श्रम पर किया गया निवेश पूरी तरह डूब गया है।
प्रशासन ने प्रभावित गाँवों का सर्वेक्षण शुरू कर दिया है। शुरुआती आकलन से पता चला है कि हजारों एकड़ खेत जलमग्न हो चुके हैं। राज्य सरकार ने फसल बीमा योजना के तहत राहत देने का आश्वासन दिया है, लेकिन किसानों का कहना है कि यह मदद उनकी वास्तविक हानि को पूरा नहीं कर पाएगी।
ग्रामीण जीवन भी संकट में है। सड़कें और पेयजल स्रोत क्षतिग्रस्त हो चुके हैं। पानी के जमाव से स्वास्थ्य संबंधी खतरे बढ़ रहे हैं। घरों और खेतों में पानी भर जाने से लोग बेहद कठिनाइयों का सामना कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि हरियाणा जैसे कृषि प्रधान राज्यों को बेहतर निकासी व्यवस्था और बाढ़ प्रबंधन की दिशा में तुरंत कदम उठाने होंगे।
मौसम विशेषज्ञ चेतावनी दे रहे हैं कि अत्यधिक वर्षा की घटनाएँ अब लगातार बढ़ रही हैं, जो जलवायु परिवर्तन का स्पष्ट संकेत है। यदि समय रहते जलवायु-रोधी खेती, आधुनिक सिंचाई व्यवस्था और आपदा प्रबंधन की रणनीतियाँ लागू नहीं की गईं, तो भविष्य में भी किसानों को इसी तरह की त्रासदी झेलनी पड़ेगी।