पुणे जिले में 273 हेक्टेयर फसल बारिश से बर्बाद

महाराष्ट्र के पुणे जिले में हुई भारी बारिश से 273 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गईं। प्याज, सब्ज़ियां, खरीफ फसलें और गेंदे के फूल सबसे ज्यादा प्रभावित हुए, जबकि पुरंदर और इंदापुर तालुके में किसानों को भारी नुकसान हुआ है।

सितम्बर 24, 2025 - 09:23
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पुणे जिले में 273 हेक्टेयर फसल बारिश से बर्बाद
पुरंदर तालुका में डूबे हुए प्याज और गेंदे के खेत, बारिश से घिरे किसान अपनी बर्बाद फसल को देखते हुए।

पुणे जिले में लगातार हो रही भारी बारिश ने किसानों की मेहनत पर पानी फेर दिया है। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, जिले में लगभग 273 हेक्टेयर क्षेत्र की फसलें बर्बाद हो गई हैं। प्याज, सब्ज़ियां, खरीफ फसलें और गेंदे के फूल सबसे ज्यादा प्रभावित हुए हैं। यह नुकसान ऐसे समय में हुआ है जब किसान अपनी फसल की कटाई की तैयारी में थे।

पुरंदर और इंदापुर तालुके सबसे ज्यादा प्रभावित क्षेत्रों में शामिल हैं। किसानों ने बताया कि गड्डों में सुरक्षित रखी प्याज की खेप पूरी तरह सड़ गई है। वहीं, खरीफ की फसलें जैसे सोयाबीन और दालों की जड़ें पानी में डूबने से खराब हो गईं। हरी सब्ज़ियों और टमाटर की फसलें भी नष्ट हो गईं, जिससे बाजार में सब्ज़ियों की कमी और दामों में उछाल का खतरा है।

गेंदे के फूल, जिन्हें किसान आने वाले त्योहारों के लिए बड़े पैमाने पर उगाते हैं, पूरी तरह सड़ गए हैं। नवरात्रि और दिवाली जैसे त्योहारों पर किसानों को अच्छी आमदनी की उम्मीद थी, लेकिन अब इनका सपना टूट गया है। इससे न केवल किसानों को आर्थिक नुकसान हुआ है बल्कि पुणे और मुंबई जैसे शहरों में फूलों की सप्लाई पर भी असर पड़ सकता है।

कृषि विभाग की टीम ने नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। पंचनामा कर प्रभावित किसानों का डेटा तैयार किया जा रहा है ताकि उन्हें मुआवजा दिया जा सके। हालांकि किसान कहते हैं कि मुआवजा अक्सर देर से मिलता है और वास्तविक लागत की भरपाई नहीं करता। किसानों ने सरकार से तुरंत राहत की मांग की है।

यह घटना एक बार फिर दिखाती है कि जलवायु परिवर्तन का असर कृषि पर लगातार बढ़ रहा है। अनियमित बारिश और ग्रामीण क्षेत्रों में जलनिकासी की कमजोर व्यवस्था किसानों के लिए बड़ी समस्या बन गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि किसानों को भविष्य में ऐसे संकट से बचाने के लिए फसल बीमा, जल प्रबंधन और विविधीकृत खेती को बढ़ावा देना ज़रूरी है।