महाराष्ट्र के 29 जिलों में 41 लाख एकड़ फसल बारिश से बर्बाद — मंत्री ने किसानों को सहायता का भरोसा दिया

इस मानसून में महाराष्ट्र के 29 जिलों में 41.57 लाख एकड़ कृषि भूमि पर खड़ी फसलें बारिश से बर्बाद हुईं। सरकार ने प्रभावित किसानों को शीघ्र मुआवजा और सहायता देने का आश्वासन दिया है।

सितम्बर 17, 2025 - 09:38
 0
महाराष्ट्र के 29 जिलों में 41 लाख एकड़ फसल बारिश से बर्बाद — मंत्री ने किसानों को सहायता का भरोसा दिया
महाराष्ट्र में भारी बारिश से जलमग्न खेत और फसल का निरीक्षण करते चिंतित किसान।

इस मानसून में महाराष्ट्र के 29 जिलों की 41.57 लाख एकड़ से अधिक कृषि भूमि पर खड़ी फसलें भारी बारिश से नष्ट हो गई हैं। धान, सोयाबीन, कपास और दालों जैसी प्रमुख फसलें जलभराव के कारण सबसे अधिक प्रभावित हुई हैं। इस प्राकृतिक आपदा ने लाखों किसानों को आर्थिक संकट में डाल दिया है और वे तुरंत राहत की मांग कर रहे हैं।

कृषि मंत्री ने बताया कि प्रभावित क्षेत्रों में नुकसान का आकलन तेजी से किया जा रहा है। जिला प्रशासन को जल्द से जल्द सर्वे पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि किसानों को समय पर मुआवजा मिल सके। सरकार ने आश्वासन दिया है कि किसी भी प्रभावित किसान को सहायता से वंचित नहीं किया जाएगा। विशेष रूप से छोटे और सीमांत किसानों को प्राथमिकता दी जाएगी।

विदर्भ और मराठवाड़ा क्षेत्रों के कई जिले, जो पहले से ही जलवायु बदलाव की मार झेलते हैं, इस बार सबसे अधिक प्रभावित हुए हैं। नाशिक, जालना, अमरावती, यवतमाल और बीड जिलों में किसानों ने खड़ी फसलों का भारी नुकसान बताया है। अनाज और तिलहन के अलावा प्याज, अनार और अंगूर जैसी बागवानी फसलें भी बुरी तरह प्रभावित हुई हैं।

विशेषज्ञों का कहना है कि इतनी बड़ी मात्रा में फसल का नुकसान महाराष्ट्र की ग्रामीण अर्थव्यवस्था पर दीर्घकालिक असर डालेगा। किसानों की आय में कमी से कई परिवार कर्ज के जाल में फंस सकते हैं और आवश्यक वस्तुओं की कीमतें भी शहरों में बढ़ सकती हैं। यह स्थिति दिखाती है कि जलवायु आपदाओं से बचाव के लिए बेहतर सिंचाई, जलनिकासी और बीमा योजनाओं की आवश्यकता है।

सरकार ने कहा है कि राहत पैकेज में प्रत्यक्ष आर्थिक मदद, फसल बीमा क्लेम और पुनर्वास सहायता शामिल होगी। साथ ही, दीर्घकालिक उपाय जैसे बाढ़-रोधी फसल किस्में, बेहतर मौसम पूर्वानुमान और ग्रामीण बुनियादी ढांचे का विकास भी किया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि केवल तत्काल मुआवजा ही नहीं, बल्कि स्थायी समाधान किसानों की सुरक्षा के लिए जरूरी है।