धराशिव में राहत सामग्री पर शिंदे-सारनािक पोस्टर विवाद, मंत्री प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे

धराशिव में बाढ़ प्रभावित इलाकों में वितरित relief पैकेजों पर उपमुख्यमंत्री शिंदे और संरक्षक मंत्री सारनािक के पोस्टर लगाए जाने से विवाद खड़ा हो गया है। राज्य मंत्री प्रभावित क्षेत्रों का निरीक्षण कर किसानों को शीघ्र मुआवज़ा देने का आश्वासन दे रहे हैं।

सितम्बर 25, 2025 - 09:12
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धराशिव में राहत सामग्री पर शिंदे-सारनािक पोस्टर विवाद, मंत्री प्रभावित इलाकों का जायजा लेने पहुंचे
धराशिव जिले में राहत सामग्री लाने वाली ट्रकों की कतार, राहत पैकेजों पर शिंदे व सारनािक के बड़े पोस्टर लगे हुए, पृष्ठभूमि में ग्रामीण लोग देख रहे हैं।

महाराष्ट्र के धराशिव जिले में बड़ी हलचल छिड़ गई है, जब बाढ़ राहत पैकेजों पर उपमुख्यमंत्री ई. शिंदे तथा संरक्षक मंत्री प्रताप सारनािक के पोस्टर लगे दिखाई दिए। ठाणे व मुंबई से 25 से अधिक ट्रक राशन किट और अन्य राहत सामग्री लेकर आए थे। ग्रामीणों और विपक्षी नेताओं ने इस कदम की निंदा की, कहा कि मानवीय संकट का राजनीतिकरण होना गलत है।

विवाद तब और बढ़ गया जब राहत डिब्बों पर नेताओं की तस्वीरें और पार्टी चिन्ह साफ दिखाई देने लगे। शिवसेना ने इसे निजी पहल बताया और कहा कि यह सरकारी धन से नहीं किया गया। लेकिन विपक्षी नेताओं का कहना है कि यह कदम आपदा राहत को राजनीति में बदलने जैसा है और तुरंत इसे बंद किया जाना चाहिए।

कृषि मंत्री दत्तात्रय भारने जब जालना के बाढ़ प्रभावित इलाकों का निरीक्षण करने गए, तो किसानों ने फसल तथा पशु नुकसान डॉक्युमेंटेशन की धीमी प्रक्रिया पर नाराजगी जताई। कई किसानों ने आरोप लगाया कि अधिकारियों ने बागों के नुकसान और पशु मृत्यु को अनदेखा किया। मंत्री ने कहा कि जिलाधिकारियों को जल्द से जल्द पंचनामा प्रक्रिया पूरी करने और मुआवज़ा सीधे खातों में भेजने का आदेश दिया गया है।

अन्य मंत्री जैसे शंभूराज देसाई और राधाकृष्ण विके पाटील (अहिल्यानगर के संरक्षक मंत्री) भी राहत कार्य देखने गए। उन्होंने बाढ़ प्रभावित इलाकों का दौरा किया, प्रभावित परिवारों से मुलाकात की और यह आश्वासन दिया कि “कोई भी बारिश पीड़ित किसान छूटेंगे नहीं।” उन्होंने अधिकारियों को पंचायत कार्यवाही तेज करने और भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए।

यह घटना यह दिखाती है कि राहत कार्यों और राजनीतिक दृश्यांकन (political optics) के बीच संतुलन कितना संवेदनशील है। जबकि अधिकारियों का कहना है कि सहायता पहुंचाना प्राथमिक है, आम जनता डरती है कि राजनीतिक ब्रांडिंग विश्वास को कमजोर कर सकती है। भविष्य में राहत कार्यों में गति, पारदर्शिता और निष्पक्षता ही आधार होनी चाहिए, न कि राजनीतिक चमक।