आर्णी में फसल तबाह: बेमौसम बारिश और ओलों ने यवतमाल में गेहूं को किया धराशायी; किसानों ने की तत्काल सर्वे की मांग

यवतमाल जिले के आर्णी तहसील में मंगलवार देर शाम हुई भारी बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि ने गेहूं की तैयार फसल को भारी नुकसान पहुँचाया है। अपनी उपज मंडी ले जाने की तैयारी कर रहे किसानों की 70-80% फसल बर्बाद हो गई है, क्योंकि बारिश के कारण अनाज का रंग काला पड़ गया है और वह भीग गया है।

मई 6, 2026 - 09:12
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आर्णी में फसल तबाह: बेमौसम बारिश और ओलों ने यवतमाल में गेहूं को किया धराशायी; किसानों ने की तत्काल सर्वे की मांग

6 मई 2026 तक की जानकारी के अनुसार, प्रकृति के कहर ने यवतमाल जिले की आर्णी तहसील के गेहूं उत्पादकों को करारा झटका दिया है। पिछले कुछ महीनों से किसानों ने अपनी गेहूं की फसल को तैयार करने के लिए अथक परिश्रम किया था और इस सप्ताह कटाई होनी थी। हालांकि, मंगलवार देर रात मौसम में आए अचानक बदलाव ने भीषण गरज और स्थानीय ओलावृष्टि के साथ सैकड़ों हेक्टेयर में खड़ी फसल को तबाह कर दिया।

बारिश का प्रभाव दो तरफा रहा है:

  • शारीरिक विनाश: बारिश के साथ चलने वाली तेज हवाओं ने गेहूं को खेतों में गिरा दिया है (Lodging), जिससे कंबाइन हार्वेस्टर के लिए कुशलतापूर्वक काम करना असंभव हो गया है।

  • गुणवत्ता में गिरावट: जिस फसल की कटाई पहले ही हो चुकी थी और ढेर लगाकर रखा गया था, बारिश के पानी ने उसके अनाज को "रंगहीन" (Discoloration) कर दिया है। चमकदार सुनहरे गेहूं का रंग काला पड़ गया है, जिससे बाजार में इसकी कीमत काफी कम हो गई है।

आर्णी के आसपास के गांवों के किसानों ने गहरा दुख व्यक्त करते हुए कहा कि वे पहले से ही कम बाजार कीमतों और बढ़ती उत्पादन लागत से जूझ रहे थे। इस प्राकृतिक आपदा ने अब उन्हें और कर्ज में धकेल दिया है। स्थानीय कृषि नेताओं ने जिला प्रशासन और राजस्व विभाग से नुकसान की सीमा का मूल्यांकन करने के लिए तत्काल "पंचनामा" (नुकसान का आकलन) करने का आग्रह किया है।

राज्य कृषि विभाग ने चेतावनी दी है कि अगले 48 घंटों में विदर्भ क्षेत्र में और बेमौसम गतिविधियां होने की संभावना है। किसानों को सलाह दी जा रही है कि वे अपनी कटी हुई फसल को सुरक्षित, ऊंचे स्थानों पर रखें और वाटरप्रूफ कवर का उपयोग करें। जिनकी फसलें अभी भी खेत में हैं, उनका नुकसान पहले ही हो चुका है, और अब समुदाय इस सीजन में जीवित रहने के लिए सरकार से वित्तीय सहायता और फसल बीमा भुगतान की ओर देख रहा है।