महाराष्ट्र में रबी 'ई-पीक पाहणी' की समय सीमा 31 मार्च तक बढ़ी: फसल बीमा और सरकारी सहायता के लिए अनिवार्य

महाराष्ट्र सरकार ने रबी सीजन 2025-26 'ई-पीक पाहणी' (डिजिटल फसल सर्वेक्षण) की समय सीमा 31 मार्च 2026 तक बढ़ा दी है। यह विस्तार अधिक किसानों को अपनी फसल का डेटा ऑनलाइन पंजीकृत करने की अनुमति देता है ताकि बीमा और भविष्य के मुआवजे की पात्रता सुनिश्चित हो सके।

मार्च 18, 2026 - 09:04
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महाराष्ट्र में रबी 'ई-पीक पाहणी' की समय सीमा 31 मार्च तक बढ़ी: फसल बीमा और सरकारी सहायता के लिए अनिवार्य
महाराष्ट्र के एक ग्रामीण खेत में एक किसान, जो सरकारी रिकॉर्ड के लिए ई-पीक पाहणी मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपनी खड़ी रबी गेहूं की फसल की फोटो खींच रहा है।

राज्य भर के किसान समुदाय के लिए एक महत्वपूर्ण राहत देते हुए, महाराष्ट्र सरकार ने आधिकारिक तौर पर रबी सीजन 2025-26 की 'ई-पीक पाहणी' (डिजिटल फसल सर्वेक्षण) की समय सीमा बढ़ा दी है। किसानों के पास अब आधिकारिक मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से अपनी फसल के डेटा का ऑनलाइन पंजीकरण पूरा करने के लिए 31 मार्च 2026 तक का समय है। ऐप में तकनीकी खामियों और कई जिलों में फसल कटाई के व्यस्त कार्यक्रमों के कारण कई किसान संगठनों द्वारा समय बढ़ाने की मांग के बाद यह निर्णय लिया गया है।

'ई-पीक पाहणी' परियोजना एक महत्वपूर्ण डिजिटल पहल है जो किसानों को अपनी फसल की जानकारी सीधे 7/12 (सातबारा) भूमि रिकॉर्ड में दर्ज करने की अनुमति देती है। यह प्रक्रिया प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना (PMFBY) के दावों के निपटान और न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर फसलों की खरीद सहित कई सरकारी लाभों के लिए अनिवार्य है। वर्तमान फसल की सत्यापित डिजिटल प्रविष्टि के बिना, किसानों को बेमौसम बारिश या कीट हमलों के मुआवजे का दावा करने में अक्सर बाधाओं का सामना करना पड़ता है।

यह विस्तार विशेष रूप से मराठवाड़ा और विदर्भ जैसे क्षेत्रों के किसानों के लिए महत्वपूर्ण है, जहां सर्दियों के उतार-चढ़ाव वाले तापमान के कारण रबी की बुवाई प्रभावित हुई थी। अतिरिक्त दो सप्ताह प्रदान करके, राज्य प्रशासन का लक्ष्य खेती वाले क्षेत्र का 100% डिजिटल सत्यापन प्राप्त करना है, जिससे यह सुनिश्चित हो सके कि कोई भी पात्र किसान सरकार के वित्तीय सुरक्षा घेरे से बाहर न रहे। जिला प्रशासनों को प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए स्थानीय 'चावड़ी' और कृषि सेवकों के माध्यम से किसानों की सहायता करने का निर्देश दिया गया है।

तकनीकी रूप से, ई-पीक पाहणी ऐप के लिए किसानों को अपनी खड़ी फसलों के GPS-टैग्ड फोटो अपलोड करने की आवश्यकता होती है। इस पारदर्शी तरीके ने भूमि रिकॉर्ड में त्रुटियों को काफी कम कर दिया है और सरकार को सटीक सिंचाई और आपूर्ति-श्रृंखला प्रबंधन की योजना बनाने में मदद की है। हालांकि, किसानों को सलाह दी जाती है कि वे पोर्टल पर संभावित सर्वर जाम से बचने के लिए अंतिम दिन (31 मार्च) तक प्रतीक्षा न करें।

जैसे-जैसे समय सीमा नजदीक आ रही है, राजस्व और कृषि विभाग ग्रामीण इलाकों में जागरूकता बढ़ाने के लिए मिलकर काम कर रहे हैं। ई-पीक पाहणी को पूरा करना न केवल एक नियामक आवश्यकता है, बल्कि किसानों के लिए अप्रत्याशित प्राकृतिक आपदाओं के खिलाफ अपने मौसमी निवेश को सुरक्षित करने की दिशा में एक सक्रिय कदम है।