महाराष्ट्र में 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बारिश से बर्बाद: कृषि मंत्री

महाराष्ट्र के 30 जिलों और 195 तालुकों में 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि भारी बारिश से प्रभावित हुई है। खरीफ फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं, जिससे किसानों की आय और खाद्य आपूर्ति पर गंभीर असर पड़ा है।

सितम्बर 17, 2025 - 10:23
 0
महाराष्ट्र में 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि बारिश से बर्बाद: कृषि मंत्री
पानी में डूबे महाराष्ट्र के ग्रामीण खेत, जिनमें खरीफ की फसलें नष्ट हो चुकी हैं, जो भारी बारिश से हुए नुकसान को दर्शाती हैं।

महाराष्ट्र के कृषि मंत्री ने बताया कि इस मानसून में लगभग 17.85 लाख हेक्टेयर कृषि भूमि भारी बारिश से प्रभावित हुई है। यह नुकसान 30 जिलों और 195 तालुकों में फैला हुआ है, जिससे यह हाल के वर्षों की सबसे गंभीर कृषि आपदाओं में से एक बन गया है। खरीफ मौसम की फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं और किसानों की आजीविका पर बड़ा असर पड़ा है।

नष्ट हुई फसलों में सोयाबीन, कपास, धान और दालें प्रमुख हैं, जो राज्य की कृषि अर्थव्यवस्था की रीढ़ मानी जाती हैं। मंत्री ने कहा कि इस वर्ष हुई अधिक और असमान बारिश के कारण कई खेत जलभराव की चपेट में आ गए, जिससे फसलें पूरी तरह नष्ट हो गईं और भूमि की उर्वरता पर भी असर पड़ा।

सरकार ने प्रभावित जिलों में नुकसान का आकलन करने और मुआवजा तय करने के लिए सर्वे शुरू कर दिए हैं। कृषि और राजस्व विभाग के अधिकारी संयुक्त रूप से सर्वे कर रहे हैं ताकि समय पर किसानों को सहायता दी जा सके। मंत्री ने आश्वासन दिया कि राज्य आपदा कोष से प्रभावित किसानों को वित्तीय सहायता दी जाएगी।

किसान संगठनों ने चिंता जताई है कि मुआवजे का वितरण समय पर होना चाहिए क्योंकि छोटे और सीमांत किसान लंबे इंतजार का बोझ नहीं उठा सकते। वे पहले से ही कर्ज और बढ़ती लागत से परेशान हैं। साथ ही उन्होंने फसल बीमा योजना का दायरा बढ़ाने और पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग की है।

कृषि मंत्री ने यह भी कहा कि भविष्य में ऐसी स्थितियों से बचने के लिए दीर्घकालिक उपायों की आवश्यकता है। इसमें बेहतर जल प्रबंधन, सिंचाई प्रणाली को मजबूत करना और जलवायु अनुकूल खेती पद्धतियों को बढ़ावा देना शामिल होगा। विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण मानसून में अनियमितता बढ़ रही है और किसानों की सुरक्षा के लिए ठोस नीतियों की आवश्यकता है।