पुणे में घोषित हो ‘वेट सूखा’, प्रभावित किसानों का कर्ज माफ किया जाए – सुप्रिया सुले

बरामती की सांसद सुप्रिया सुले ने महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया है कि पुणे जिले में लगातार भारी बारिश के कारण ‘वेट सूखा’ घोषित किया जाए। उन्होंने किसानों पर पड़े आर्थिक बोझ को कम करने के लिए कर्ज माफी की भी मांग की।

सितम्बर 18, 2025 - 10:48
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पुणे में घोषित हो ‘वेट सूखा’, प्रभावित किसानों का कर्ज माफ किया जाए – सुप्रिया सुले
पानी से भरे खेत में खड़ा एक चिंतित किसान, जिसकी गन्ना और सोयाबीन की फसल डूब गई है।

पुणे जिले में लगातार भारी बारिश के चलते फसलों में जलभराव की स्थिति बनी हुई है, जिसे ‘वेट सूखा’ कहा जाता है। बरामती सांसद सुप्रिया सुले ने इस पर चिंता जताई है और महाराष्ट्र सरकार से आग्रह किया है कि इसे आधिकारिक रूप से ‘वेट सूखा’ घोषित किया जाए। उन्होंने कहा कि जैसे सूखा पानी की कमी से आता है, वैसे ही लगातार अधिक बारिश भी किसानों और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को बर्बाद कर सकती है।

पुणे के बरामती, दौंड, इंदापूर और पुरंदर तालुकों में सोयाबीन, गन्ना और प्याज जैसी फसलें बुरी तरह प्रभावित हुई हैं। किसानों ने बताया कि लगातार नमी से उनकी फसलें खराब हो गईं और उनकी बाजार कीमत भी काफी घट गई। सुले ने कहा कि छोटे और सीमांत किसान, जिन्होंने कर्ज लेकर खेती की थी, अब उसे चुकाने की स्थिति में नहीं हैं।

सुले ने महाराष्ट्र सरकार से प्रभावित किसानों के लिए व्यापक कर्ज माफी की मांग की। उनका कहना है कि केवल कर्ज पुनर्गठन पर्याप्त नहीं होगा, क्योंकि पहले से ही कर्ज के बोझ तले दबे किसान बिना मजबूत आर्थिक मदद के उबर नहीं पाएंगे। उन्होंने यह भी सुझाव दिया कि आगामी सीजन में किसानों को इनपुट सब्सिडी दी जाए ताकि वे दोबारा आत्मविश्वास से खेती कर सकें।

सांसद ने यह भी चेताया कि यदि समय पर किसानों की मदद नहीं की गई तो इसका असर केवल कृषि पर ही नहीं, बल्कि ग्रामीण समाज और अर्थव्यवस्था पर भी पड़ेगा। उन्होंने केंद्र और राज्य सरकार से मिलकर इस समस्या का हल निकालने का आह्वान किया।

कृषि विशेषज्ञों का मानना है कि ‘वेट सूखा’ की अवधारणा को नीतियों में अधिक महत्व दिए जाने की जरूरत है। जैसे सूखा घोषित होते ही मुआवजा मिलता है, वैसे ही अधिक बारिश से हुए नुकसान के लिए भी आधिकारिक घोषणा जरूरी है। इससे न केवल किसानों को राहत मिलेगी बल्कि भविष्य में बेहतर जल निकासी व्यवस्था और फसल बीमा योजनाओं को भी बढ़ावा मिलेगा।