IMD का पूर्वानुमान: सितंबर में सामान्य से अधिक मॉनसून बारिश की संभावना

इंडिया मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने अनुमान लगाया है कि सितंबर माह में देश के कई हिस्सों में लंबी अवधि के औसत से अधिक (109%) बारिश हो सकती है, जिससे बाढ़ एवं भूस्खलन का खतरा बढ़ सकता है।

सितम्बर 1, 2025 - 10:19
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IMD का पूर्वानुमान: सितंबर में सामान्य से अधिक मॉनसून बारिश की संभावना
IMD द्वारा जारी भारत का मॉनसून Rainfall Forecast मैप, जिसमें ऊँचाई पर बारिश वाले क्षेत्र हरे-ब्लू रंगों से दर्शाए गए हैं।

भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) ने सितंबर 2025 के लिए महत्वपूर्ण पूर्वानुमान जारी करते हुए बताया है कि इस माह औसत से 109% वर्षा हो सकती है। यह अनुमान सामान्य 167.9 मिमी से कहीं अधिक है, जिससे संकेत मिलता है कि इस साल मॉनसून की वापसी में देरी होगी। अगस्त में पहले ही बेहतर वर्षा हो चुकी है, जिसने किसानों और जलाशयों को राहत दी है, लेकिन सितंबर में जारी रहने वाली बारिश ग्रामीण और शहरी दोनों इलाकों के लिए नए अवसर और चुनौतियाँ लेकर आएगी।

विशेषज्ञों का कहना है कि यह बारिश जहाँ देर से बोई गई फसलों जैसे दलहन, तिलहन और मोटे अनाज के लिए वरदान साबित होगी, वहीं दूसरी ओर अत्यधिक वर्षा कई राज्यों में आपदा का कारण भी बन सकती है। खासतौर पर उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर जैसे राज्यों में भूस्खलन और अचानक आई बाढ़ की घटनाओं का खतरा अधिक होगा। IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने चेतावनी दी है कि पश्चिमी विक्षोभ और मॉनसून धाराओं की टकराहट से मौसम का रुख देर तक बरसाती बना रह सकता है।

खेती के लिहाज से यह परिदृश्य मिला-जुला असर डालेगा। देर से बोई गई फसलों को पर्याप्त नमी मिलेगी और उत्पादन में वृद्धि की संभावना बढ़ेगी। लेकिन धान और कपास जैसी कटाई के लिए तैयार फसलें पानी भरने और बीमारियों के कारण प्रभावित हो सकती हैं। ऐसे में किसान एक ओर बारिश से खुश हैं, तो दूसरी ओर नुकसान की आशंका भी उन्हें चिंतित कर रही है।

अगस्त माह में उत्तर-पश्चिम भारत ने पिछले कई दशकों की सबसे अधिक वर्षा दर्ज की थी। अब यह सिलसिला सितंबर में भी जारी रह सकता है। इससे बाढ़, सड़क अवरोध और संपत्ति का नुकसान जैसी समस्याएँ बढ़ सकती हैं। हालांकि सकारात्मक पक्ष यह है कि नदियाँ, झीलें और भूजल स्तर भरपूर रहेंगे, जिससे आने वाले रबी सीजन में सिंचाई की सुविधा बेहतर होगी। इससे किसानों को भविष्य के लिए उम्मीद मिलेगी।

सरकार और प्रशासन को इस परिदृश्य में तुरंत कदम उठाने होंगे। बाढ़ नियंत्रण, राहत कार्य, किसानों को समय पर सलाह और फसल की सुरक्षा के उपाय प्राथमिकता पर रखने होंगे। IMD ने सुझाव दिया है कि किसानों को डिजिटल माध्यमों और स्थानीय चैनलों से समय पर मौसम की जानकारी दी जाए ताकि वे अपनी खेती और कटाई के कार्यक्रम में बदलाव कर सकें। यदि ऐसा हुआ तो सितंबर की अतिरिक्त बारिश किसानों के लिए लाभकारी सिद्ध हो सकती है।